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क्यों..?? बिहार में हर साल बढ़ते जा रहे है कैंसर के मरीज

बुधवार, 22 सितंबर 2021

/ by Prem yadav


बिहार इस समय बहुत ही मुश्किल दौर से गुज़र रहा है बिहार में हर साल 1500 से 1700 से भी अधिक कैंसर के मरीज देखने को मिल रहे है, और इससे अभी तक बिहार बशियो अनजान है। आइये जानते है बिहार में कैंसर के मरीजों की बढ़ने का क्या कारण है।
जांच से पता चला है कि बिहार में भूमिगत जल में आर्सेनिक की मात्रा बहुत ज्यादा बढ़ गई है। बिहार में 80% लोग भूमिगत जल ही ट्यूएबेल या चापाकल की सहायता से पीते है। जल के माध्यम से आर्सेनिक लोगो के शरीर मे पहुँच रहा है और कैंसर का कारण बन रहा है।
फिलहाल ही एक रिसर्च से ये पता चला है कि लोगो के शरीर मे आर्सेनिक पानी से ज्यादा आलू, चाबल और गेहुँ से पहुँच रहा है। लोग समझ नही पा रहे है कि इन सब मे आर्सेनिक कैसे आ रहा है तब पता चला कि सिंचाई के लिए जो हमलोग भूमिगत जल उपयोग में ला रहे है उसी जल के जरिये आर्सेनिक आलू, गेहुँ और चाबल में पहुँच रहा है। WHO के अनुसार जल में आर्सेनिक अधिकतम 10 मैक्रो ग्राम होना चाहिए प्रति एक लीटर लेकिन बिहार के जल में ये मात्रा कई गुणा अधिक है। यह बिहार का बहुत बड़ा समस्या बन चुका है। 17 sep को down to earth न्यूज़पेपर ने यह न्यूज़ अपने अंदर प्रकाशित की है।
आर्सेनिक आबर्त सारणी के पंचम समूह का एक रासायनिक तत्व है। आर्सेनिक में अधातु के गुण अधिक तथा धातू के गुण कम होते है। आर्सेनिक को As से सूचित किया जाता है। इसकी परमाणु क्रमांक 33 है इसका परमाणु भार 74.16 है।
आर्सेनिक यौगिक अबस्था में पृथ्बी पर अनेक स्थानों पर पाया जाता है। ज्वालामुखी के वाष्पों में, समुन्द्र तथा अनेक खनिजिय जलो में यह मिश्रित रहता है।
आर्सेनिक से बहुत सारी रोग होती है। ये हमारे तंत्रिका तंत्र को नुकसान पहुँचाता है, हमारे त्वचा और ह्रदय को भी नुकसान पहुँचाता है। यह हमारी अंतःस्रावी ग्रथियो को भी नुक्सान पहुँचाता है। स्वसन में परेशानी आने लगती है, नब्ज के अंदर कैंसर होने लगता है। बच्चे के अंदर चाइल्ड मोडलिटी बढ़ जाती है, बच्चे का बजन कम होने लगता है। जो युवा है उनके अंदर कैंसर होने की संभावना बढ़ जाता है। 
ज्यादा आर्सेनिक लेने पर पैरो और हाथों पर इस तरह का निशान पड़ जाता है।
आर्सेनिक के बढ़ने का मुख्य कारण यह हो सकता है कि हम किट नाशक के रूप में आर्सेनिक का ज्यादा इश्तेमाल कर रहे है या माइनिंग में कारण बढ़ता जा रहा है या फिर लकड़ी को सुरक्षित रखने के लिए जो रसायन प्रयोग किये उसके माध्यम से आर्सेनिक की मात्रा बढ़ रही है।

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