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Nature

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दारू और दोस्त

बुधवार, 13 अक्तूबर 2021

/ by Prem yadav


मैं और मेरा दो दोस्त पार्टी का प्लान बनाये और पार्टी इसलिए मनाया जा रहा था कि हमने दारू छोड़ दी थी। मैं पहुँचने में थोड़ा लेट हो गया जब पहुँचा तो देखा कि दोनों पी रहे थे। भाईसाहब मेरा मुझपर थोड़ा भी कंट्रोल नही रहा मैं पीटना चालू कर दिया इतना पीटा की मेरी आँख सूज गई। लड़ाई जब तक चलती रही तब की बार का मैनेजर प्यार से समझा कर नही गया वो बहुत प्यार से बोला कि शांत से बैठो नही तो बाहर फेकबा दूंगा। मैं भी गुस्से में था आव न देख़ा ताव चुप चाप बैठ गया। हम बार मे बैठ में दारू छोड़ने की पार्टी कर रहे थे। लेकिन पार्टी करने के लिए मेरे पास पैसे नही थे क्योंकि मैं गरीबी रेखा के नीचे भी एक रेखा होती है उस रेखा वाले लोग भी मेरे से अमीर थे। एक दोस्त ने तो मोबाइल बेचने को तैयार हो गया। मैं भी सोच में पड़ गया कि ये दारू छोड़ेंगे जो दारू के लिए मोबाइल बेच रहा है। दूसरे ने कहाँ तू मोबाइल मत बेच मैं पैसा लाता हूँ मेरे पापा के जेब मे लोन की किस्तें भरने की पैसे रखी हुई है। मैं भी सोचा कि अगर ढेर सारे पैसो में से 500  1000 निकल ही जायेगा तो क्या ही दिक्कत है लेकिन वो महास्य जेब मे सिर्फ 500 rs छोड़ बाकी सारे पैसे ले चला आया। उसके पापा को लोन का क़िस्त भरने के लिए loan लेना पड़ा।
हमने ढेर सारी दारू मंगाई क्योंकि हमारे पास ढेर सारे पैसे थे। हमने इतना पिया पिया की यमराज जी खुद मना करने आये की अगर अगला पैक सूंघ भी लिया तो अभी अपने साथ ले जाऊँगा। हमने डर से पीना छोड़ दिया अभी भी दारू बची हुई थी। राजा ने आईडिया दिया कि तीनों बराबर बराबर बाट लेते और घर ले जाते है मैन पूछा क्यों तो बोला कि अगर रात में माहौल बना तो पीने के लिए।
हम तीनों रूम पर पहुचे लड़ाई के वजह से मेरा आंख दर्द कर रहा था और मैं नाक पकड़े था मुझे पता ही नही चल रहा था की दर्द कहाँ है जब खुद को आईने में देखा तब समझ आया कि दर्द तो सर में है। वो तो मुझे जब दिखना कम हुआ तब समझ आया कि आँख में ही दर्द है। मैंने राजा को बोला की यार आंख में दवा दे दे दर्द कर रहा उसने दवा दी अब मुझे दिखाई देना भी बंद हो गया था क्योंकि वो हरामी दवा के जगह ink मेरे आंख में डाल दिया था। उसको बोलने पर वो डस्टर लिए खड़ा था बोल रहा था लो परमानेंट ink नही है लाओ डस्टर से मिटा देते है। मैं भागा वहाँ से, मेरे लाइफ में जितना भी कांड हुआ है न उसमे सारा का सारा हाथ इस राजा का ही है। समझ नही आ रहा था क्या करूँ एक आँख सूजा था और दूसरे में ink था। मैंने फेसबुक पर पोस्ट डाल के हेल्प मांगने की सोची वहाँ बहुत टैलेंटेड इंसान होते है। मैं फेसबुक में लॉगिन किया तो मैं पासवर्ड ही भूल गया था। मैन फॉरगेट पासवर्ड किया और वो भी भूल गया फिर मैं राजा से बोला तू पासवर्ड लिख। मैं फ़ेसबुक में लॉगिन करने लगा उससे पासवर्ड पूछा तो वो बोला P मैं लिख दिया फिर बोला A मैं लिख दिया फिर बोला S मैं लिखा दिया फिर बोला S मैं उसे देखा और बोला कि पक्का इसके बाद WORD होगा। वो बेबकुफ़ इन्शान password ही लिख दिया था। किसी तरह से फेसबुक लॉगिन हुआ। मैं पोस्ट डाला और इंतेज़ार करने लगा कि कोई हेल्प करेगा। उसमे से एक ने कमेंट किया कि डॉक्टर के पास जा एक और ने एक नंबर कमेंट किया बोला की बात कर बहुत बड़े तांत्रिक है ठीक हो जाएगा। इसमे कोई लॉजिक नही लेकिन मुझे ये बात उस समय बहुत बेहतर लगा मैन कॉल किया अपना समस्या बताया बाबा बोले कि पूजा करवाना पड़ेगा। उन्होंने पूजा की समान लिखवाना शुरू किए 4 नारियल 2 तरह के सिंदूर एक लार्ज पिज़्ज़ा 2 बर्गर। मुझे समझ नही आ रहा था की पूजा होगा कि पेट पूजा। हमने पूजा वाला आईडिया छोड़ दिया। फिर एक दोस्त ने कॉल किया और बड़े प्यार से ढेर सारा गाली देके समझाया तब हम सब डॉक्टर के पास जाने को तैयार हुआ। 
तीनो निकले वो दोनों मुझे गाड़ी चलाने दिया जिसका दोनो आंख में दिक्कत था। मैं पूरे आधा घंटा तक गाड़ी चालू करने की कोशिश की तब पता चला कि हमारे पास तो गाड़ी ही नही उतना देर से मैं हवा में पैर मार के गाड़ी चालू करने की कोशिश कर रहा था। वहाँ से रोड पर गए बस को हाथ दिए और ऑटो पर बैठ गए। आगे जाके पुलिस वाले ने मास्क चेक किया और हम तीनों को पकड़ लिया जबकि हम मास्क लगाए हुए थे लेकिन मुँह पर नही सर पर। फिर भी पुलिस वाले ने चालान नही काटी क्योंकि उनको भी लगा जो अपने पेंट तक नही है, उनके यहाँ क्या ही पैसा होगा। हम तीनों में से कोई भी पैंट नही पहने हुए था। ऊपर शर्ट और टाई था लेकिन नीचे सिर्फ चड्ढी। पुलिस वाले के बाद हमलोग डॉक्टर के पास गए। डॉक्टर हमे इतना गालियां दिया इतना गालियां दिया कि वहाँ बैठे हम तीनों के अलावे वहाँ जीतने लोग थे सब के कान से खून आ गई लेकिन हम तीनों को कुछ फर्क नही पड़ा। हमे समझ नही आ रहा था कि डॉक्टर ने इतना गाली क्यों दिया फिर पता चला कि वो जानवरों का डॉक्टर है और हम उसे आंख का इलाज करने के लिए तंग कर रहे थे। किसी तरह से आंख के डॉक्टर के पास पहुँचा इलाज करबाया। अब तक सबेरे हो चुका था हम तीनों चाय पीने गए लेकिंन चाय वाले ने पैसे नही मांगे क्योंकि वो भी सोचा जिसके पास पैंट के लिए पैसे न हो वो क्या ही चाय का पैसा देगा।
हम तीनों अभी तक चड्डी पर ही थे।

😂😂😁😁

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By- Prem Yadav With Pankaj Dhwaz Yadav