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Nature

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माँ

गुरुवार, 22 जुलाई 2021

/ by Prem yadav




पति पत्नी आने वाले त्योहार की खरीदारी के लिए बाजार जा रहे थे। तभी पति की नज़र बरामदे में बैठी उसकी बूढी माँ पर पड़ी वो माँ के पास गया और बोला माँ तुम्हें भी कुछ चाहिए तो बता दो ला दूंगा लेकिन माँ ने मना कर दिया। बेटे के बहुत ज़िद्द करने पर माँ ने कुछ लिखा और बेटे को थमा दी। पति कागज ले गाड़ी में बैठा और अपनी पत्नी से बोला कि इस बार माँ भी कुछ लाने को बोली है वो भी लिस्ट बना के दी है। आखिर इन्शान को खाने और पहनने के अलाबा भी तो कुछ चाहिए। पत्नी बोली पहले मैं खुद का शॉपिंग कर लुंगी फिर तुम्हारी माँ के लिस्ट का शॉपिंग करूँगी। पत्नी खुद का शॉपिंग करते करते थक जाती है और आके गाड़ी में ac ऑन करके बैठ जाती है, और पति से बोलती है "की मैं बहुत थक गई हूँ तुम अपने माँ का लिस्ट का शॉपिंग खुद कर लो"
पति ने मा का लिस्ट पति पत्नी को दिया पत्नी फिर बोली "इतना बड़ा लिस्ट आखिर माँ को इतना क्या चाहिए " इतना बोल वो लिस्ट फिर से अपने पति को थमा दी।  पति के आंखों में आंसू था और हाथ सूखे पत्तों की तरह कॉप रहा था। शरीर बेसुध सा हो गया था। पत्नी ने झट से वो लिस्ट पति से ली 
उसमे ज्यादा कुछ नही चंद ही चीजे लिखी हुई थी।
उस कागज में लिखा था...।
मेरे आंखों के तारे कलेजे के टुकड़े मेरे प्यारे बेटे मुझे इस त्योहार क्या किसी त्योहार पर कुछ नही चाहिए।
अगर तुम इतना जिद कर ही रहे हो तो..... अगर किसी दुकान पर मिले तो मेरे लिए थोड़ा फुरसत के कुछ पल लेते आना। मुझे अब अकेलापन से डर लगने लगा है, ये बुढापा काटना है, मुझे तन्हाई से डर लगने लगा है। तो जब तक मैं जिंदा हूँ मेरी सासे जब तक चल रही है कुछ पल बैठा कर मेरे पास, कुछ देर के लिए ही सही बाट लिया कर मेरे बुढ़ापे का अकेलापन। कितने साल हो गए बेटा तुम्हे स्पर्श नही किया। एक बार फिर से आ मेरी गोदी में सर रख मैं ममता भरी हाथो से तेरे सर को सहलाऊंगी। एक बार फिर से मेरा दिल बाग बाग हो जाता  मेरे अपनो के करीब बहुत करीब पा कर। फिर मैं आराम से मुस्कुरा के मौत के गले लगा लू क्या पता अगले त्योहार तक रहू न रहू। 
 ये पढ़ कर दोनो रोने लगे

हमारे माता पिता को ढलते उम्र के साथ हमारा बहुत सारा सिर्फ प्यार सम्मान और आदर चाहिए। और कुछ नही लेकिन हम लोग अपने काम मे इतना खो जाते है कि उनके लिए समय नही निकाल पाते जिन्होंने हमे ये काबिल बनाया।
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By- Prem Yadav With Pankaj Dhwaz Yadav