Responsive Ad Slot

Nature

Nature

Story

Story

National

National

History

History

Religious

Religious

Superstition

Superstition

VIDEO

Videos

दारू और दोस्त

कोई टिप्पणी नहीं


मैं और मेरा दो दोस्त पार्टी का प्लान बनाये और पार्टी इसलिए मनाया जा रहा था कि हमने दारू छोड़ दी थी। मैं पहुँचने में थोड़ा लेट हो गया जब पहुँचा तो देखा कि दोनों पी रहे थे। भाईसाहब मेरा मुझपर थोड़ा भी कंट्रोल नही रहा मैं पीटना चालू कर दिया इतना पीटा की मेरी आँख सूज गई। लड़ाई जब तक चलती रही तब की बार का मैनेजर प्यार से समझा कर नही गया वो बहुत प्यार से बोला कि शांत से बैठो नही तो बाहर फेकबा दूंगा। मैं भी गुस्से में था आव न देख़ा ताव चुप चाप बैठ गया। हम बार मे बैठ में दारू छोड़ने की पार्टी कर रहे थे। लेकिन पार्टी करने के लिए मेरे पास पैसे नही थे क्योंकि मैं गरीबी रेखा के नीचे भी एक रेखा होती है उस रेखा वाले लोग भी मेरे से अमीर थे। एक दोस्त ने तो मोबाइल बेचने को तैयार हो गया। मैं भी सोच में पड़ गया कि ये दारू छोड़ेंगे जो दारू के लिए मोबाइल बेच रहा है। दूसरे ने कहाँ तू मोबाइल मत बेच मैं पैसा लाता हूँ मेरे पापा के जेब मे लोन की किस्तें भरने की पैसे रखी हुई है। मैं भी सोचा कि अगर ढेर सारे पैसो में से 500  1000 निकल ही जायेगा तो क्या ही दिक्कत है लेकिन वो महास्य जेब मे सिर्फ 500 rs छोड़ बाकी सारे पैसे ले चला आया। उसके पापा को लोन का क़िस्त भरने के लिए loan लेना पड़ा।
हमने ढेर सारी दारू मंगाई क्योंकि हमारे पास ढेर सारे पैसे थे। हमने इतना पिया पिया की यमराज जी खुद मना करने आये की अगर अगला पैक सूंघ भी लिया तो अभी अपने साथ ले जाऊँगा। हमने डर से पीना छोड़ दिया अभी भी दारू बची हुई थी। राजा ने आईडिया दिया कि तीनों बराबर बराबर बाट लेते और घर ले जाते है मैन पूछा क्यों तो बोला कि अगर रात में माहौल बना तो पीने के लिए।
हम तीनों रूम पर पहुचे लड़ाई के वजह से मेरा आंख दर्द कर रहा था और मैं नाक पकड़े था मुझे पता ही नही चल रहा था की दर्द कहाँ है जब खुद को आईने में देखा तब समझ आया कि दर्द तो सर में है। वो तो मुझे जब दिखना कम हुआ तब समझ आया कि आँख में ही दर्द है। मैंने राजा को बोला की यार आंख में दवा दे दे दर्द कर रहा उसने दवा दी अब मुझे दिखाई देना भी बंद हो गया था क्योंकि वो हरामी दवा के जगह ink मेरे आंख में डाल दिया था। उसको बोलने पर वो डस्टर लिए खड़ा था बोल रहा था लो परमानेंट ink नही है लाओ डस्टर से मिटा देते है। मैं भागा वहाँ से, मेरे लाइफ में जितना भी कांड हुआ है न उसमे सारा का सारा हाथ इस राजा का ही है। समझ नही आ रहा था क्या करूँ एक आँख सूजा था और दूसरे में ink था। मैंने फेसबुक पर पोस्ट डाल के हेल्प मांगने की सोची वहाँ बहुत टैलेंटेड इंसान होते है। मैं फेसबुक में लॉगिन किया तो मैं पासवर्ड ही भूल गया था। मैन फॉरगेट पासवर्ड किया और वो भी भूल गया फिर मैं राजा से बोला तू पासवर्ड लिख। मैं फ़ेसबुक में लॉगिन करने लगा उससे पासवर्ड पूछा तो वो बोला P मैं लिख दिया फिर बोला A मैं लिख दिया फिर बोला S मैं लिखा दिया फिर बोला S मैं उसे देखा और बोला कि पक्का इसके बाद WORD होगा। वो बेबकुफ़ इन्शान password ही लिख दिया था। किसी तरह से फेसबुक लॉगिन हुआ। मैं पोस्ट डाला और इंतेज़ार करने लगा कि कोई हेल्प करेगा। उसमे से एक ने कमेंट किया कि डॉक्टर के पास जा एक और ने एक नंबर कमेंट किया बोला की बात कर बहुत बड़े तांत्रिक है ठीक हो जाएगा। इसमे कोई लॉजिक नही लेकिन मुझे ये बात उस समय बहुत बेहतर लगा मैन कॉल किया अपना समस्या बताया बाबा बोले कि पूजा करवाना पड़ेगा। उन्होंने पूजा की समान लिखवाना शुरू किए 4 नारियल 2 तरह के सिंदूर एक लार्ज पिज़्ज़ा 2 बर्गर। मुझे समझ नही आ रहा था की पूजा होगा कि पेट पूजा। हमने पूजा वाला आईडिया छोड़ दिया। फिर एक दोस्त ने कॉल किया और बड़े प्यार से ढेर सारा गाली देके समझाया तब हम सब डॉक्टर के पास जाने को तैयार हुआ। 
तीनो निकले वो दोनों मुझे गाड़ी चलाने दिया जिसका दोनो आंख में दिक्कत था। मैं पूरे आधा घंटा तक गाड़ी चालू करने की कोशिश की तब पता चला कि हमारे पास तो गाड़ी ही नही उतना देर से मैं हवा में पैर मार के गाड़ी चालू करने की कोशिश कर रहा था। वहाँ से रोड पर गए बस को हाथ दिए और ऑटो पर बैठ गए। आगे जाके पुलिस वाले ने मास्क चेक किया और हम तीनों को पकड़ लिया जबकि हम मास्क लगाए हुए थे लेकिन मुँह पर नही सर पर। फिर भी पुलिस वाले ने चालान नही काटी क्योंकि उनको भी लगा जो अपने पेंट तक नही है, उनके यहाँ क्या ही पैसा होगा। हम तीनों में से कोई भी पैंट नही पहने हुए था। ऊपर शर्ट और टाई था लेकिन नीचे सिर्फ चड्ढी। पुलिस वाले के बाद हमलोग डॉक्टर के पास गए। डॉक्टर हमे इतना गालियां दिया इतना गालियां दिया कि वहाँ बैठे हम तीनों के अलावे वहाँ जीतने लोग थे सब के कान से खून आ गई लेकिन हम तीनों को कुछ फर्क नही पड़ा। हमे समझ नही आ रहा था कि डॉक्टर ने इतना गाली क्यों दिया फिर पता चला कि वो जानवरों का डॉक्टर है और हम उसे आंख का इलाज करने के लिए तंग कर रहे थे। किसी तरह से आंख के डॉक्टर के पास पहुँचा इलाज करबाया। अब तक सबेरे हो चुका था हम तीनों चाय पीने गए लेकिंन चाय वाले ने पैसे नही मांगे क्योंकि वो भी सोचा जिसके पास पैंट के लिए पैसे न हो वो क्या ही चाय का पैसा देगा।
हम तीनों अभी तक चड्डी पर ही थे।

😂😂😁😁

क्यों..?? बिहार में हर साल बढ़ते जा रहे है कैंसर के मरीज

2 टिप्‍पणियां


बिहार इस समय बहुत ही मुश्किल दौर से गुज़र रहा है बिहार में हर साल 1500 से 1700 से भी अधिक कैंसर के मरीज देखने को मिल रहे है, और इससे अभी तक बिहार बशियो अनजान है। आइये जानते है बिहार में कैंसर के मरीजों की बढ़ने का क्या कारण है।
जांच से पता चला है कि बिहार में भूमिगत जल में आर्सेनिक की मात्रा बहुत ज्यादा बढ़ गई है। बिहार में 80% लोग भूमिगत जल ही ट्यूएबेल या चापाकल की सहायता से पीते है। जल के माध्यम से आर्सेनिक लोगो के शरीर मे पहुँच रहा है और कैंसर का कारण बन रहा है।
फिलहाल ही एक रिसर्च से ये पता चला है कि लोगो के शरीर मे आर्सेनिक पानी से ज्यादा आलू, चाबल और गेहुँ से पहुँच रहा है। लोग समझ नही पा रहे है कि इन सब मे आर्सेनिक कैसे आ रहा है तब पता चला कि सिंचाई के लिए जो हमलोग भूमिगत जल उपयोग में ला रहे है उसी जल के जरिये आर्सेनिक आलू, गेहुँ और चाबल में पहुँच रहा है। WHO के अनुसार जल में आर्सेनिक अधिकतम 10 मैक्रो ग्राम होना चाहिए प्रति एक लीटर लेकिन बिहार के जल में ये मात्रा कई गुणा अधिक है। यह बिहार का बहुत बड़ा समस्या बन चुका है। 17 sep को down to earth न्यूज़पेपर ने यह न्यूज़ अपने अंदर प्रकाशित की है।
आर्सेनिक आबर्त सारणी के पंचम समूह का एक रासायनिक तत्व है। आर्सेनिक में अधातु के गुण अधिक तथा धातू के गुण कम होते है। आर्सेनिक को As से सूचित किया जाता है। इसकी परमाणु क्रमांक 33 है इसका परमाणु भार 74.16 है।
आर्सेनिक यौगिक अबस्था में पृथ्बी पर अनेक स्थानों पर पाया जाता है। ज्वालामुखी के वाष्पों में, समुन्द्र तथा अनेक खनिजिय जलो में यह मिश्रित रहता है।
आर्सेनिक से बहुत सारी रोग होती है। ये हमारे तंत्रिका तंत्र को नुकसान पहुँचाता है, हमारे त्वचा और ह्रदय को भी नुकसान पहुँचाता है। यह हमारी अंतःस्रावी ग्रथियो को भी नुक्सान पहुँचाता है। स्वसन में परेशानी आने लगती है, नब्ज के अंदर कैंसर होने लगता है। बच्चे के अंदर चाइल्ड मोडलिटी बढ़ जाती है, बच्चे का बजन कम होने लगता है। जो युवा है उनके अंदर कैंसर होने की संभावना बढ़ जाता है। 
ज्यादा आर्सेनिक लेने पर पैरो और हाथों पर इस तरह का निशान पड़ जाता है।
आर्सेनिक के बढ़ने का मुख्य कारण यह हो सकता है कि हम किट नाशक के रूप में आर्सेनिक का ज्यादा इश्तेमाल कर रहे है या माइनिंग में कारण बढ़ता जा रहा है या फिर लकड़ी को सुरक्षित रखने के लिए जो रसायन प्रयोग किये उसके माध्यम से आर्सेनिक की मात्रा बढ़ रही है।

Love आजकल.........(Online प्यार) Last part

कोई टिप्पणी नहीं


रॉनी एक फैमिली फंक्शन में एक लड़की को देखा। पता चला था कि वो उसकी बहन की ही दोस्त है। रॉनी अपनी बात अपने बहन से शेयर करना चाह रहा था लेकिन गलती से उस लड़की रूही से ही बोल दिया। उस समय तो रुही कुछ नही बोली। रॉनी उसका जबाब का इंतेज़ार कर रहा था।.... अब आगे
अगले दिन रॉनी के व्हाट्सएप पर एक मैसेज आया। रॉनी डीपी चेक किया वहाँ कोई फ़ोटो नही थी फिर रॉनी ने मैसेज का रिप्लाई दिया लिखा "कौन"
उधर से रिप्लाई आया "रुही"
रॉनी को अब खुशी का कोई ठिकाना नही था। उसको लग रहा था की उसका सारा सपना सच हो गया। वो बाते करना शुरू कर दिया। रुही भी बोली की वो उसे पसंद करती है। दोनो अब घंटो बात करने लगे थे। रॉनी को उसके सपनो की राजकुमारी मिल गई थी वो उसे खुश करने के लिए हमेशा कुछ न कुछ करते रहता था जो रुही को भी बहुत अच्छा लगता था। दोनो के प्यार परबाने चढ़ रहे थे दोनो ने तो शादी तक कि बात सोच रखी थी दोनो अपने फैमिली में बात भी करने का प्लान बना रहे थे। फैमिली से भी ज्यादा दिक्कत नही आती क्योंकि दोनो का कास्ट भी समान था। रॉनी को तो बस यही लग रहा था की जल्दी से जॉब लू और उसे अपने घर लाऊ। 
अब तक 6 महीने बीत चुके थे पता नही क्यों लेकिन रॉनी को लग रहा था कि रुही कुछ बदली बदली सी लग रही है। इधर कुछ दिन से वो बिना बात के भी लड़ाई करने लगी है। रॉनी को ये सब अच्छा नही लग रहा था। वो रुही को मिलने के लिए बुलाया थोड़ा नखरा करने के बाद रुही मिलने को आ गई। दोनो बात चीत किये लेकिन रुही में बहुत बदलाव नज़र आ रहा था। रुही किसी बात से नाराज़ होके वहाँ से चली गई। रॉनी बहुत कॉल किया लेकिन वो न कॉल उठाई न मैसेज का जबाब ही दे रही थी। रॉनी को समझ नही आ रहा था कि क्या हो रहा है। एक कॉल के बदले 4 कॉल करने वाली आज कॉल तक नही उठा रही आखिर मैं किया क्या हूँ यही सब सोच सोच के रॉनी परेशान हो गया। 3  4 दिन बीत गया लेकिन रुही न कॉल की न मैसेज रॉनी बहुत कोशिश की बात करने को लेकिन रुही बात नही की वो सीधा जबाब दे दी वो अब बात करना नही चाहती है। रॉनी उसके यादो में खोया रहने लगा रात की नींद उड़ गई थी उसकी, कोई भी काम मे उसका मन नही लगता था। अब ऐसे ही कुछ महीने बीत चुके थे। एक दिन पता चला रॉनी को की रुही का उसके छोड़ने का कारण एक लड़का है। उस लड़के का नाम अमन था वो अच्छे घर का पैसे वाला था उसका जॉब भी होने वाला था। रुही को अमन से ऑनलाइन दोस्ती हुई थी। लेकिन रुही उससे प्यार करने लगी थी। रॉनी ये बात जानकर उसे बहुत ज्यादा दुख हुआ वो और भी टूट गया अब उसकी राते रोती हुई कटने लगी। उसके साथ बहुत बड़ा धोखा हुआ था। कुछ दिन रॉनी का हाल ऐसा ही रहा लेकिंन फिर वो अपने आप को सम्हाला और अपने पढ़ाई में लग गया। 
तकरीबन 6 महीने बाद रॉनी को एक नये नम्बर से कॉल आया। रॉनी ने कॉल उठाई उधर से एक लड़की की आवाज़ सुनाई दी "हेल्लो रॉनी"
वो रुही की आवाज़ थी, रॉनी के आंखों में आँसू आ गई उसकी सारे यादे ताज़ा हो गई थी। 
रॉनी चुप रहा वो कुछ नही बोला फिर उधर से रोते हुए आवाज़ आई "रॉनी बोलो न"
रॉनी ने रुही को रोता सुन वो पूछा क्या हुआ। 
तो रुही बोलना शुरू की उससे बहुत बड़ी गलती हो गई है। वो बोली कि वो एक गलत लड़के के जाल में फस गई हूँ प्लीज मेरा हेल्प करदो नही तो मैं मुँह दिखाने लायक नही रहूंगी, इतना बोल रुही जोर जोर से रोने लगी।
रॉनी ने उसे चुप करबाया और पूरा मामला पूछा तो रुही बताई की 
अमन से उसे ऑनलाइन दोस्ती हुई थी धीरे धीरे वो मुझे इम्प्रेस कर के मेरा दोस्ती को प्यार में बदल दिया। शुरू में तो वो बहुत अच्छा बर्ताब करता था, हमेशा खुश रखता था, जो बोलती थी वो ऑनलाइन पहुँचा देता था। मैं उसके साथ बहुत ज्यादा ही खुश थी। हम दोनो कभी सामने से मिलने नही थे लेकिन वीडियो कॉल पर बात बहुत बार हुई थी। लेकिन कुछ दिन के बाद अमन का बर्ताब बदल गया बहुत ज्यादा ही बदल गया था अब वो बात बात पर मुझे गाली देने लगा था। हमेशा मुझे हर्ट करने लगा था। वो मुझसे इतना गंदा बर्ताब करने लगा कि मुझे उससे नफरत होने लगी। मैं अब उससे दूर जाना चाहती थी। लेकिन वो मुझे नही जाने दे रहा था अब वो मुझे ब्लैकमेल करने लगा था दरसल मैं प्यार में इतना अंधी हो गई थी कि उसे कुछ पर्सनल फ़ोटो भी भेज दी थी। अब वो धमकी दे रहा है कि वो फ़ोटो इंटरनेट पर वायरल कर देगा अगर वो ऐसा किया तो मैं सुसाइड कर लुंगी।
रॉनी को ये सारी बाते सुनके बहुत गुस्सा आया लेकिन अभी गुस्से से कुछ नही होने वाला था।
रॉनी ने अपने दोस्त से मदद माँग उसके दोस्त के चाचा पुलिस के बड़े अफसर थे। पुलिस के मदद से अमन को गिरफ्तार किया गया। रुही की सारी प्राइवेट फ़ोटो डिलीट कर दी गई। अब रुही खुश थी लेकिन उसे बहुत ज्यादा अफसोस महसूस कर रही थी, वो एक कोयले के चलते अपना हीरा खो चुकी थी।


                THE END

Love आज कल......(online प्यार) part-1

कोई टिप्पणी नहीं


रॉनी शांत स्वभाव का एक लड़का था। उसके दोस्त कम ही थे। वो पढ़ाई पूरी कर चुका था और नौकरी के तलाश में लगा था। आज कल के लड़कों से एकदम अलग था वो किसी से ना के ही बराबर मतलब रखता था इसी कारण शायद उसके दोस्त नही बन पाए थे। पता नही क्यों लेकिन लड़की से कोषों दूर रहता था।रॉनी के लाइफ में सब कुछ अच्छा ही चल रहा था।
रॉनी एक फैमिली फंक्शन में गया किसी से ज्यादा बात न करके एक कोने में बैठा ही था बहुत सारे लोग आए हुए थे लेकिन फिर भी वो अकेला ही बैठा रहा। वो बैठा कुछ सोच ही रहा था कि उसकी नज़र नीचे बाहर रोड पर खड़ी एक लड़की पर गई वो किसी से बाते कर रही थी चश्मा लगाई हुई पूरी सादगी में मुश्कान ऐसा की मानो अगर वो मुश्कुराये तो बागों में बहार आ जाये मौसम खुमार हो जाये। हवा के कारण बार बार बाल उसके फेस पर आ रहा था जिसे वो बार बार हटा रही थी उस समय ऐसा फील हो रहा था मानो की आसमान अपने ऊपर से बादल हटा रहा हो। बहुत लड़कियो से मिल चुका था रॉनी लेकिन किसी से मिलकर ऐसा फीलिंग नही आया था कुछ तो खास बात थी उस लड़की में। रॉनी तो बस उसे देखता ही रह गया। कुछ देर के बाद वो वहाँ से चली गई रॉनी दौड़ता हुआ नीचे गया ताकि देख पाए कि वो लड़की गई कहाँ जब तक वो नीचे गया वो वहाँ से जा चुकी थी। इतना जल्दी वो किधर चली गई पता ही नही चला इधर उधर जाके देखा भी लेकिन कही नही दिखी। रॉनी अपने किस्मत को कोसता हुआ बापस आ गया लेकिंन रॉनी उस लड़की की वो पहली झलक भूल नही पा रहा था उसी की यादो में डूबा था। रॉनी उसके याद में इतना डूब गया की वो लड़की उसको सामने दिख रही थी वहीं फंक्शन में उसकी ही बहन से बात करती हुई। वो अपने आप को सम्हाला तो देखा सच मे वो लड़की वही पर थी। रॉनी का तो खुशी का कोई ठिकाना नही रहा। अब रॉनी उससे बात करने को सोची लेकिन वो पहले कभी ऐसा नही किया था तो उसको बात करने की हिम्मत नही हुई। पूरी फंक्शन में वो उसे ही देखता रहा लेकिन बात नही कर पाया। एक कोने में बस उससे देख देख के पागलो की तरह मुस्कुरा रहा था। 
फंक्शन खत्म हुआ सारे मेहमान जाने लगे। रॉनी रात भर जगा था जिसके कारण वो लेट तक सोता ही रह गया। जब वो जगा तो उस लड़की का याद आया उसे खोजने के लिए इस कमरे से उस कमरे गया सारा कमरा छान मारा लेकिन वो नही दिखी शायद वो जा चुकी थी। रॉनी उदास हो गया। रॉनी रात को उस लड़की से अपनी बहन को बात करते देखा था। रॉनी सोचा क्यों न बहन से ही पूछ लिया जाए वो कौंन थी। रॉनी किसी तरह से बातो ही बातों में उस लड़की के बारे में पूछा तब पता चला कि वो लड़की उसकी बहन की ही सहेली है दोनो एक साथ ही होस्टल में रहती है और उसका नाम रूही है। रॉनी मन ही मन बहुत खुश हुआ क्योंकि उस लड़की से मिलने और बात करने का मौका मिल सकता था। अब क्या था छोटा छोटा काम के लिए रॉनी अपनी बहन के होस्टल पहुँच जाता था। धीरे धीरे रूही से भी बात होने लगी। रॉनी को रूही से बात करके अलग ही आंनद मिलता था वो चाहता था कि उसी से बात करता रहे। वो मन ही मन रूही से प्यार करने लगा था। रॉनी बहुत बार चाहा कि वो अपने दिल की बात बता दे लेकिन नही बता पा रहा था। 
रॉनी सोचा क्यों न अपने दिल की बात बहन के साथ शेयर किया जाए वो उसे msg किया और अपने दिल की सारी बात बता दी तब रॉनी को पता चला कि वो अपनी बहन से नही बल्कि उसकी सहेली से ही बात कर रहा था। जो बोलना था वो रॉनी बोल चुका था अब जबाब का इंतेज़ार कर रहा था लेकिन उधर से इसका कोई जबाब नही आया। वो offline हो गई। रॉनी सोचा कही वो गुस्सा तो नही हो गई लेकिन अब कर भी क्या सकता था। वो बस इंतेज़ार करने लगा।................



आगे की कहानी अगले पार्ट में....

Killer कौन.......??? Last part

3 टिप्‍पणियां


हर्ष लावण्या से बंदूक छीना और उसका गला जोड़ से दबा दिया। अभी उसका गला दबाया ही था कि पीछे से हर्ष के सर पर किसी ने बंदूक तान दी। जब हर्ष पलट के देखा तो वो चौक गया वो कोई और नही वही खूंखार कालीचरण था। हर्ष को बंदूक नीचे फेंकनी पड़ी अब हर्ष और उत्कर्ष दोनो पकड़ा जा चुका था। कालीचरण हर्ष को मारने ही वाला था  की लावण्या बंदूक उठाई और कालीचरण पर तान दी और बोली कि "अपनी बंदूक फेक नही तो गोली मार दूंगी"। कालीचरण ने बंदूक फेक दी, हर्ष भौचक्का हो कर देखता ही रह गया। लावण्या ने अपनी कहानी सुनाना शुरू की 
मैं एक प्राइवेट स्कूल में टीचर हूँ मेरी एक सिर्फ छोटी बहन है। जब मैं जिम में हर्ष से मिली थी हम दोनों की दोस्ती हो गई थी। तब एक दिन मेरे मोबाइल पर एक कॉल आया उधर से जो आदमी था वो बोला कि "जो मैं कहता हूँ तुम चुप चाप वही करोगी नही तो तुम्हारी बहन तुमसे दुबारा कभी नही मिल पाएगी जैसा मैं कह रहा हूँ ऐसा ही करो काम पूरा होते ही तुम्हारी बहन तुम्हारे पास पहुँच जायेगी"। वो आदमी ने कहाँ की हर्ष को प्यार की जाल में फ़साओ और उससे NSA से फ़ाइल लाने को बोलो। हर्ष तुम तो प्यार में फस गए लेकिन तुम चोरी करने के लिए तैयार नही हुए। मेरी बहन के जान का सवाल था वो जैसा जैसा बोलते गया मैं करती गई। वो बोला कि तुम उत्कर्ष को प्यार के जाल में फ़साओ। मैं उत्कर्ष से भी प्यार का नाटक करने लगी लेकिन पता नही कब वो नाटक सच मे प्यार में बदल गई पता ही नही चला। उत्कर्ष के साथ रहना घूमना उसके साथ टाइम बिताना बहुत अच्छा लगता था मुझे। लेकिंन मुझे अंदर ही अंदर घुटन भी हो रही थी क्योंकि मैं उत्कर्ष के साथ एक तरह से धोका ही दे रही थी लेकिन मैं करती भी क्या मैं मजबूर थी। उस दिन जब उत्कर्ष को पता चल गया कि मैं उसे धोखा दे रही हूँ उस दिन वो मेरे घर आया। उत्कर्ष बहुत गुस्से में था वो आया और मुझे एक थप्पड़ जड़ दिया, बहुत बातें भी बोला। तब मैं उत्कर्ष को सारी सच बता दी। उत्कर्ष सच सुनकर मुझे गले लगा लिया और बोला रो मत कुछ न कुछ हल इसका निकाल ही लेंगे। दोनो इस परेशानी से निकलने की सोच ही रहे थे कि तभी ही कालीचरण यानी कि काल आ धमकता है अपने गुंडो के साथ। कालीचरण ही लावण्या को कॉल करके ये सब करने को बोला था। उत्कर्ष वही था अब कालीचरण का काम आसान था। उत्कर्ष ने कालीचरण से सौदा किया की वो NSA से फ़ाइल चोरी करके लाएगा वो लावण्या की बहन को छोड़ दे। कालीचरण इस सौदा के लिए तैयार हो गया। उत्कर्ष के साथ अपने आदमी भी भेज दिया ताकि वो पुलिस के पास न जाके अपना मिशन करे और हिदायत भी दी की अगर कोई होशियारी की तो लावण्या के साथ साथ इसकी बहन भी मारी जाएगी। ये सारी बाते लावण्या की एक सहेली सुनीता सुन ली लेकिन काल के आदमी ने उसे पकड़ लिया। उधर पता चला कि उत्कर्ष चोरी तो कर लिया लेकिन वो पहचान में आ गया। काल का मिशन खतरे में था। लावण्या और उत्कर्ष को खोजते हर्ष पुलिस पास चला जाता तो मामला और बिगड़ जाता इसलिए काल ने सुनीता का खून कर उसका चेहरा बिगाड़ दिया और वही पर सबूत के तौर पर उत्कर्ष के फिंगरप्रिंट छोड़ दिया। और कुछ दिन बाद ही उत्कर्ष को भी झूठ का मार दिया। उत्कर्ष चोरी तो किया था लेकिन वो फ़ाइल काल को नही दिया। क्योंकि जिस पेनड्राइव में फ़ाइल था वो कही खो गई थी।
लावण्या अभी बोल ही रही थी कि काल का आदमी चारो तरफ से तीनों को घेर लेता है। 
काल हर्ष और लावण्या को बहुत मारता है। अब वो दोनो को गोली मारने ही वाला होता है कि सुरेश वहाँ पुलिस के साथ आ जाता है काल के गुंडों और पुलिस में मुठभेड़ होती है और आखिर में काल पकड़ा जाता है। 
सुरेश बताता है कि वो अंडरकवर पुलिस है उसको ये फ़ाइल चोरी के बारे में भनक लगी थी कि देश की सुरक्षा खतरे में है तब से ही वो NSA के हेड के पीछे लग जाता है। वो हर्ष का मदद करना चाहता था लेकिन काल ने साजिश कर सुरेश को ही गुनेहगार बना दिया। हर्ष के नज़र में सुरेश गुनेहगार था इसलिए वो कॉल पर कुछ भी बताता तो वो सच नही समझता इसलिए मिलने को गोडाउन बुलाया था। मैं वहाँ इंतेज़ार कर रहा था लेकिन तुम यहाँ चले आये। लेकिन मैं अपने खबरी के मदद से यहाँ पहुँच गया।
लावण्या अभी भी उदास और परेशान थी तभी एक आवाज़ सुनी "दीदी"
लावण्या जब पलट के देखी तो उसकी बहन उसके तरफ दौड़ी आ रही थी। लावण्या ने प्यार से उसे गले लगा लिया और रोने लगी। लावण्या की बहन को भी वही रखा गया गया था छुपा के लेकिन हर्ष सीसीटीवी के मदद से खोज लिया। 
चारो खुशी खशी घर चले गए उधर कालीचरण को भी उम्र कैद की सज़ा हो गई।


                         THE END

माँ

2 टिप्‍पणियां




पति पत्नी आने वाले त्योहार की खरीदारी के लिए बाजार जा रहे थे। तभी पति की नज़र बरामदे में बैठी उसकी बूढी माँ पर पड़ी वो माँ के पास गया और बोला माँ तुम्हें भी कुछ चाहिए तो बता दो ला दूंगा लेकिन माँ ने मना कर दिया। बेटे के बहुत ज़िद्द करने पर माँ ने कुछ लिखा और बेटे को थमा दी। पति कागज ले गाड़ी में बैठा और अपनी पत्नी से बोला कि इस बार माँ भी कुछ लाने को बोली है वो भी लिस्ट बना के दी है। आखिर इन्शान को खाने और पहनने के अलाबा भी तो कुछ चाहिए। पत्नी बोली पहले मैं खुद का शॉपिंग कर लुंगी फिर तुम्हारी माँ के लिस्ट का शॉपिंग करूँगी। पत्नी खुद का शॉपिंग करते करते थक जाती है और आके गाड़ी में ac ऑन करके बैठ जाती है, और पति से बोलती है "की मैं बहुत थक गई हूँ तुम अपने माँ का लिस्ट का शॉपिंग खुद कर लो"
पति ने मा का लिस्ट पति पत्नी को दिया पत्नी फिर बोली "इतना बड़ा लिस्ट आखिर माँ को इतना क्या चाहिए " इतना बोल वो लिस्ट फिर से अपने पति को थमा दी।  पति के आंखों में आंसू था और हाथ सूखे पत्तों की तरह कॉप रहा था। शरीर बेसुध सा हो गया था। पत्नी ने झट से वो लिस्ट पति से ली 
उसमे ज्यादा कुछ नही चंद ही चीजे लिखी हुई थी।
उस कागज में लिखा था...।
मेरे आंखों के तारे कलेजे के टुकड़े मेरे प्यारे बेटे मुझे इस त्योहार क्या किसी त्योहार पर कुछ नही चाहिए।
अगर तुम इतना जिद कर ही रहे हो तो..... अगर किसी दुकान पर मिले तो मेरे लिए थोड़ा फुरसत के कुछ पल लेते आना। मुझे अब अकेलापन से डर लगने लगा है, ये बुढापा काटना है, मुझे तन्हाई से डर लगने लगा है। तो जब तक मैं जिंदा हूँ मेरी सासे जब तक चल रही है कुछ पल बैठा कर मेरे पास, कुछ देर के लिए ही सही बाट लिया कर मेरे बुढ़ापे का अकेलापन। कितने साल हो गए बेटा तुम्हे स्पर्श नही किया। एक बार फिर से आ मेरी गोदी में सर रख मैं ममता भरी हाथो से तेरे सर को सहलाऊंगी। एक बार फिर से मेरा दिल बाग बाग हो जाता  मेरे अपनो के करीब बहुत करीब पा कर। फिर मैं आराम से मुस्कुरा के मौत के गले लगा लू क्या पता अगले त्योहार तक रहू न रहू। 
 ये पढ़ कर दोनो रोने लगे

हमारे माता पिता को ढलते उम्र के साथ हमारा बहुत सारा सिर्फ प्यार सम्मान और आदर चाहिए। और कुछ नही लेकिन हम लोग अपने काम मे इतना खो जाते है कि उनके लिए समय नही निकाल पाते जिन्होंने हमे ये काबिल बनाया।

आर्मेनिया का मांझी

1 टिप्पणी


 


मुझे सही से नहीं पता कि क्यों जब भी हम पुराने मंदिर पिरामिड या सिर्फ गुफाओं को देखते हैं तो हमें हमेशा इतिहास याद आता है हम अपने दिमाग में ही यह सोचने लग जाते हैं कि इनको कैसे बनाया गया होगा।  आज भी पूरी दुनिया यह समझ नहीं पाई है कि हमारे पूर्वजों ने कैसे इतने सालों पहले बिना किसी तकनीकी सहायता के ऐसे गजब के नमूने बना डाले। जिनको हम आज भी नहीं बना सकते। कुछ लोग कहते हैं कि इन्हें बनाने में दशको या फिर शतकों का समय लगा होगा। चलिए जो भी हुआ हो वह हम फिर कभी पता लगाएंगे लेकिन ना सिर्फ इतिहास में लोग ऐसी चीजें बनाते थे बल्कि आज भी लोग इसी तरह की कला के शौकीन हैं और इसी के बारे में आज आप मेरी एक कहानी सुनने वाले हैं। आज आप देखेंगे कि कैसे एक साधारण से गांव में रहने वाले एक आदमी ने कैसे अपने सिर्फ हाथों का इस्तेमाल करके एक ऐसी कला तैयार की जिसे दुनिया देखते ही दंग रह गई। इसे अंडरग्राउंड एंटीक स्टाइल मे सिटी के नाम से भी जाना जाता है। ये सब उन्होंने अपने बेसमेंट में तैयार किया। तो चलिए लेवोन से मिलिए। एक ऐसा आदमी जिन्होंने अपनी बेसमेंट में एक अलग ही दुनिया बना रखी है। और यह सब उन्होंने अपने ज्ञान से संभव किया लेकिन इन सबके बीच में एक सबसे खास बात यह थी कि उन्होंने यह सब बिना किसी खास तकनीक की सहायता के किया। 

जी हां उन्होंने इसके लिए कोई भी खास मशीनें इस्तेमाल नहीं करी। उनकी इच्छा और उनके सपने उनके साथ थे। जी हां एक ऐसा सपना कुछ ऐसा बनाने का जिसे पूरी दुनिया याद रखें और जैसा कि आमतौर पर होता आया है यह सब भी बहुत अजीब तरीके से शुरू हुआ।  सन 1985 का यह एक आम दिन था। और उस दिन 44 साल के लेवोन ने अपने घर के नीचे कुछ और काम ना देखते हुए खुदाई करनी शुरू करी। असल में ऐसा काम करने के लिए उनकी पत्नी ने ही उन्हें बार बार बोला था। लेकिन उन्हें टाइम नहीं मिल रहा था उन्होंने बस अपनी पत्नी के कहने पर आलस भरा शरीर के साथ यह काम करना शुरू किया। वह धीरे-धीरे खुदाई कर रहे थे और तभी उनको एक पत्थर वहां जमीन में मिला। लेवोन उस पत्थर पर खुदाई करने लगे लेकिन वह पत्थर इतना मजबूत था की वो उसे काट नहीं पाए। जिसके बाद उन्होंने अलग दिशा में खुदाई करनी शुरू कर दी। लेकिन दोबारा से उनको अपने पावों के नीचे पत्थर मिला और यह बार-बार होता गया। जिसके बाद लेवोन ने फिर से अपनी दिशा बदली और यहां पर वह आगे खुदाई करते चले गए देखते ही देखते उन्होंने अच्छी खासी सुरंग खोद डाली। जिसके बाद उन्होंने सोच लिया कि वो इसी सुरंग के आगे अलग दुनिया बनाएंगे। 

उन्हें इस तरह से खुदाई करने में इतना मजा आने लगा था कि अब उन्होंने इसे ही अपनी जिंदगी बना लेने का फैसला किया। उनकी पत्नी ने कहा था कि जिस दिन से उनके पति ने खुदाई करनी शुरू कर दी थी उस दिन के बाद से वह एक अलग इंसान बन गए। 1 दिन भी ऐसा नहीं बीता जब उन्होंने खुदाई रोकी हो। लेवोन को भी अपने दोस्तों के साथ इधर-उधर घूमना बहुत पसंद था। लेकिन इस काम में पड़ने के बाद उन्होंने भी वो बंद कर दिया।  उनके द्वारा सुरंग से आगे बनाया गया एक कमरा अब इतना बड़ा बन चुका था। जिसमें वह अपना अच्छा सामान रख सकते थे। उनकी पत्नी ने अब उन्हें रुक जाने के लिए कहा। लेकिन वहां पर नहीं रुके जिसके बाद समय बीता और देखते ही देखते उन्होंने उस बेसमेंट में अपनी खुद की ही एक दुनिया बनानी शुरू कर दी। पूरा एक साल बीत गया और उसके बाद ना जाने कितने और लेकिन लेवोन ने अपना काम जारी रखा। उन्होंने प्साल्ट की कठोर चट्टानों को काटा वो भी सिर्फ एक हथौड़े और  छेनी की सहायता से। हम सब को पता है कि पेसाल्ट जैसे चट्टानों के साथ काम करना कितना मुश्किल काम होता है लेकिन लेवोन ने  अपनी इस दुनिया में दीन के 17 घंटे काम किया लेकिन इन घंटों में भी काम करते हुए वो पेसाल्ट की चट्टान में 7 सेंटीमीटर से ज्यादा खुदायी नहीं कर पाए। लेकिन पता नहीं क्यों पर जब उनके सामने मुश्किल काम आता उनकी काम करने की रफ्तार और तेज हो जाती। 

समय बीतने के साथ-साथ उनकी बेसमेंट में और ज्यादा कमरे शामिल होते गए। उनकी पत्नी ने कहा कि उन्होंने तो ऐसा कभी सोचा भी नहीं था कि उनके पति एक बेसमेंट खोदने की रिक्वेस्ट पर एक पूरा शहर ही खोद डालेंगे और ये शहर उनकी जिंदगी का सबसे बड़ा प्रोजेक्ट बन कर सामने आएगा। कुछ साल और इस काम में बीत गए और अब उनकी पत्नी उनसे हाथ जोड़कर ये  रिक्वेस्ट कर रही थी कि वह अब और खुदाई ना करें क्योंकि यह काम करते हुए उनकी तबीयत कई बार खराब हो चुकी थी। जरा सोच कर देखिए लेवोन अपने पूरे दिन में सिर्फ 4 घंटे सोते और इससे भी ज्यादा हैरान कर देने वाली बात यह थी कि वह ज्यादातर 2 दिन में एक बार ही खाना खाते थे।  अपने पति को ना सुनता देख और उनकी इच्छा के आगे उनकी पत्नी हार गई और उन्होंने भी लेवोन को  अब रोकना बंद कर दिया अब जहां उनकी पत्नी लेवोन को समझने की कोशिश कर रही थी वही उनके पड़ोसी और उनके दोस्त यह समझ ही नहीं पा रहे थे कि लेवोन करना क्या चाहते हैं। सभी ने उसे नोहा के साथ कंपेयर करना शुरू कर दिया।  क्योंकि नोहा भी उनकी तरह सालों तक वह काम करते थे जिसका कोई मतलब नहीं था लेकिन हमारी कहानी के हीरो ने लोगों की नहीं सुनी। उसे उनसे कुछ फर्क नहीं पड़ा और वह बस अपना काम करते रहे और तब आर्मेनिया का सबसे बुरा समय चल रहा था। 

पूरे देश में बार-बार लंबे-लंबे बिजली कट हो रहे थे । पर लेवोन ने फिर भी खुदाई नहीं रोकी। वह अपने घर से एक मोमबत्ती उठाकर अपनी दूसरी दुनिया में पहुंच जाते इस तरह से उनकी मेहनत को देखते हुए हम यह भी कह सकते हैं कि लेवोन में बिना रुके और बिना थके काम किया कुछ सालों का समय और बीता। और इतने सालों बाद लोगों को उनके काम की यह खूबसूरती नजर आने लगी। उन्होंने अपने घर के नीचे गुफाओं का पूरा चाल बना रखा था। उनकी पत्नी को तो विश्वास ही नहीं हो रहा था कि उनके पति ऐसा कुछ बना सकते हैं। उन गुफाओं को देख कर ऐसा लगता था  जैसे हमारे पूर्वजों द्वारा बनाए गए हो । उनकी पत्नी को उन पर बहुत गर्व हो रहा था। अब उसे देखकर कोई भी यह विश्वास नहीं  कर पा रहा था कि यह सब एक गांव में रहने वाले बुजुर्गों द्वारा बनाया गया हो धरती के नीचे बने हुए कमरे इतिहासिक खूबसूरती लपेटे हुए थे। और उन्हें बहुत ध्यान से इतिहास को ध्यान में रखते हुए सजाया गया था। छोटी-छोटी बारीकियां कैसे उभरकर सामने आई यह तो आप भी समझ सकते हैं।  सीढ़ियां हॉल बरामदे दीवारें इन्हें देखकर ऐसा लग ही नहीं रहा था कि इन्हें आज के समय में बनाया गया हो । जो भी इसे यहां देखने आता वह विश्वास कर ही नहीं पाता कि यह सब कुछ एक अकेले आदमी ने बनाया होगा। सभी लोग यही मानते थे जरूर लेवोन ने किसी की सहायता ली होगी या फिर इन्हें बनाने में जरूर बड़ी-बड़ी मशीनों का सहारा लिया गया होगा। 

ऐसी बातों को सुनकर लेवोन यही कहते, कि हां उनको भगवान ने एक अलग ही शक्ति दे रखी है जिससे उन्होंने यह चमत्कार किया। वह दुनिया से कहते थे की जब वो सोने जाते थे उनके दिमाग में  बस नए आइडिया वहीं आते और वह सुबह उठ कर उन्हे तराश देते । बिना किसी बाहरी सहायता के उन्हें पता था कि उन्हें अगला कमरा कैसे और कितना बड़ा बनाना है। इस पूरे तामझाम को बनाने के लिए लेवोन ने अपनी जिंदगी के पूरे 23 साल लगा दिए।  और इस पूरे समय के बीच उनको हमेशा यही महसूस होता है कि वह कुछ अच्छा बना रहे हैं जो कि दुनिया को दिखाना बहुत जरूरी है । वह अपनी इस दुनिया से बहुत प्यार करते थे।  वह इसका ध्यान अपनी जान से भी ज्यादा रखते थे। अब जरा इस बात को ध्यान से सुनिए वह अपने निर्णय के प्रति इतने पक्के थे उन्होंने पूरे सात मंजिला अंडरग्राउंड शहर बनाया। जी हां आपने सही सुना सात मंजिला और यह पूरे 23 मीटर गहरा था। पहली मंजिल को पार करने के लिए आपको 80 सीढ़ियां उतरकर जाना पड़ेगा। 23 साल के इस कामकाज में लेवोन ने  पूरे 600 ट्रक मिट्टी और पत्थरों को अपने इस शहर से बाहर निकाला। वह बड़े-बड़े पत्थरों के कॉलम्स के डिजाइन तैयार करने में ही कई कई महीनों का समय लगा देते थे। बदकिस्मती से 2008 में उनकी मौत हो गई थी और उस समय उनकी उम्र मात्र सतासठ सालों की थी। अपने अंतिम दिनों में भी यही कहते थे कि अभी भी उनका यह शहर बनना बाकी है। उन्होंने अपनी जिंदगी के 23 साल इस पर लगा दिए। पर उनका मानना था कि अभी 30 सालों का समय इसे पूरा करने में और लगेगा। बेशक उनकी मौत हो चुकी थी लेकिन उनके बारे में अफवाहें फिर भी यही उड़ती रही और जैसे-जैसे यह अफवाह उड़ी, उनके इस काम को देखने के लिए लोग दूर-दूर से आने लगे। सभी लोग इसे आर्मेनिया का एक चमत्कार ही मानते थे।  बेशक आज उनकी पत्नी की उम्र बहुत ज्यादा हो चुकी है लेकिन आज भी जब लोग उनके पति द्वारा बनाए गए इस काम को देखने आते हैं तो वह खुद खड़े होकर सभी कोई शहर का दौरा करवाती है।

सभी को कोना कोना इस जगह का दिखाना बहुत पसंद करती है। जल्दी ही यह जगह इतनी फेमस हुई कि लेवोन की पत्नी ने इस जगह को दिखाने के लिए लोगों के ग्रुप बनाने शुरू कर दिए।  और आज के समय में यही उनका मुख्य बिजनेस बन चुका है।  उन्हें अपने पति द्वारा किए गए इस काम पर बहुत नाज है। इस पूरे शहर के एक कमरे में उनकी पत्नी ने उनका एक म्यूजियम भी बना रखा है जिसमें उन्होंने वह सारे हथौड़े और छैनी रखी है। जिनकी सहायता से यह पूरा स्ट्रक्चर तैयार किया गया था। इसके अलावा वहां पर लेवोन की कुछ फोटोस भी टंगी हुई है जिन्हें आप देख सकते हैं। यहां पर बहुत सारी मूवीस की शूटिंग भी हो चुकी है । आज के समय में तीन लाख से ज्यादा लोग दुनिया भर से इसे देखने आ चुके हैं। और आज के समय में ही उनकी पत्नी इसे लेवोंस डिवाइन अंडर ग्राउंड के नाम से बुलाना पसंद करती है। बेशक बहुत से लेवोन को पागल समझते थे लेकिन आज के समय में उनका यही पागलपन आर्मेनिया में घूमने का एक मुख्य स्थान बन चुका है। उनकी पत्नी बताती है कि जब वह और उनके मेहमान इसे देखने के लिए इसके अंदर जाते हैं तो पता नहीं क्यों पर घूमने आने वाले लोग यहां पर अपनी मन्नत मांगना शुरू कर देते हैं। शायद उनके पास ऐसे मन्नतें मांगने का कोई खास कारण मौजूद होगा।  बदकिस्मती से आज लेवोन इस दुनिया में नहीं है लेकिन वहीं लाखो लोग आज भी जगह में खाश शक्ति मानते हैं ।

दोस्तों आप इस कहानी के बारे में क्या सोचते हैं क्यों लेवोन ने  अपनी लगभग आधी जिंदगी एक अंडरग्राउंड शहर को बनाने में बिता दी। आप अपने विचार मुझे कमेंट सेक्शन में जरूर बताएं।


© | All Rights Reserved
By- Prem Yadav With Pankaj Dhwaz Yadav